चीन ने भारत के संग सीमा विवाद को सुलझाने पर जताई सहमती

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पिछले काफी समय से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद चल रहा है. इतिहास भी इस बात का गवाह है कि भारत और चीन में सीमा विवाद अक्सर होता रहता है.

चीन जिन मुद्दों को लेकर भारत पर हावी होने की कोशिश करता है उन्हीं मुद्दों पर अब वह शांति बनाने के लिए बोल रहा है.

अचानक से चीन के तेवर बदले=बदले नजर आ रहे हैं. चीन ने भारत से सीमा विवाद को तूल न देने की बात कही है.

इतना ही नहीं एक आदर्श देश की तरह चीन का कहना है, कि न इन मुद्दों को तूल दिया जाए और ना ही सीमा के अमन-चैन पर खलल पड़े.

अरुणाचल प्रदेश से लगे सामरीक रूप से संवेदनशील असफिला इलाके में भारतीय सैनिकों के ‘अतिक्रमण’ पर चीन विदेश मंत्रालय ने विरोध जताया था. इस पर बीजिंग की शिकायत को भारतीय पक्ष ने खारिज कर दिया है.

इसी बीच चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने इस मामले पर टालमटोल करते हुए कहा, ‘चीन भारत सीमा पर हाल ही में घटित जिस घटना का आपने जिक्र किया है. मैं उस मामले में अच्छी तरह वाकिफ नहीं हूं.

सीमा मुद्दे के समाधान तक उम्मीद है कि समझौता प्रोटोकॉल के तहत भारतीय पक्ष नियंत्रण रेखा का सम्मान और इसका पालन करें. मुद्दों को तूल देने से परहेज करते हुए सिमी क्षेत्र में अमन-चैन बहल रखने के चीन के साथ मिलकर काम करें.

अपने बयान उन्होंने आगे कहा, कि भारत-चीन सीमा पर चीन का रुख समान और स्पष्ट है. चीन की सरकार ने तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को कभी मान्यता नहीं दी.

चीन और भारत सीमाई मुद्दों को सुलझाने और उचित तर्कसंगत समाधान के लिए विचार विमर्श और समझौता वार्ता में भागीदारी कर रहे हैं. जो कि दोनों पक्षों को स्वीकार्य है.

सीमा विवाद को लेकर अब तक दोनों देश कई बार बात कर चुके हैं, लेकिन मामला आज तक अपने अंजाम तक नहीं पहुंचा है. अब तक दोनों देशों के बीच 20वें दौर की वार्ता हो चुकी है.